ऐसे आलम में मुस्कुराना है Poem by Anjum Alinagari

ऐसे आलम में मुस्कुराना है

ऐसे आलम में, , मुस्कुराना है।
जब के महंगा, ये आबो दाना है।

महंगा पेट्रोल हो गया तो क्या
मेरा साईकिल से आना जाना है ।।

हम ग़रीबों को पुछता है कौन
पूंजी पतियों का ये ज़माना है।

मिल के रहने लगें यहां बच्चे
ऐसा हिंदुस्तां, बनाना है।।।।

हम सफ़र में हैं, तुम सफ़र में हो
कौन जाने कहां ठिकाना है।।।

सारे आलम को फायदा होगा
पेड़ पत्थर पे अब उगाना है।।।

क्या किया आज तक ज़माने में,
खुद को खो कर ये आज़माना है।।।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Friday, September 18, 2026
POET'S NOTES ABOUT THE POEM
मंहगाई की नज़र
COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Anjum Alinagari

Anjum Alinagari

Alinagar, Darbhanga
Close
Error Success