अंजुमन इस्लामिया चक्रधरपुर। Poem by Anjum Alinagari

अंजुमन इस्लामिया चक्रधरपुर।

देखा जो कल, न सोचा था, हम ने ये ख़्वाब में।
अये अंजुमन इस्लामिया, तेरे इंतख़ाब में।

उल्फ़त मुहब्बत प्यार था सब में भरा हुआ।
मिल्लत की बेहतरी के लिए सब खड़ा हुआ।

जज़्बा था साथ, जोश था‌, सबमें जनून था।
बाहर था, थोड़ा हल्ला, अंदर सकून था।

सब की टीकी नज़र थी, हर एक वोट पर ।
सोया नहीं था रात भर, घर में कोई बशर ।

सबको नतीजा आने का, बस इंतज़ार था।
पलकें बिछाए बैठे थे, दिल बेक़रार था।


ख़िदमत का मोक़ा, मिल के दिया है अवाम ने।
लग जाएं ओहदेदार अब मिल्लत के काम में।


उम्मीद है यक़ीन है, बदलेगा ये समाज ।
रखेंगे ओहदेदार जब, ओहदे का अपने लाज।


तालीम के मैदान में, उतरेगी जब ये टीम ।
उम्मत के बच्चे तब ही बनेंगे बड़े अज़ीम ।


हक़दार हक़ से चुके न इतना ख़्याल हो ।
हक़ सबको मिले, इसलिए हाकिम बहाल हो।

हर हार एक सबक़ है, हर जीत इम्तिहान ।
लरज़े क़दम न हरगिज़, फिसले नहीं ज़ुबान।
©अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Friday, September 18, 2026
Topic(s) of this poem: islamic
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18/9/23 को अंजुमन इस्लामिया चक्रधरपुर के चुनाव परिणाम पर कही गई कविता
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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