मंहगाई की मार ने मारा Poem by Anjum Alinagari

मंहगाई की मार ने मारा

मंहगाई की मार ने मारा ।
आपस के तकरार ने मारा ।

भारत में रहने वालों को
बोलो किस, सरकार ने मारा।।।।

बचे हुए कुछ लोग थे जिनको
ज़िंदा, इस अख़बार ने मारा।।।।।

जीत गए, तो जीते थे पर
हार गए तो, हार ने मारा।।।।

बेईमानों, और शैतानों को
हक़ के लिए, हक़दार ने मारा।।।

कहता है मज़दूर, किसान।
उसको इस संसार ने मारा ।।।।।

लैला कहती है मजनु से
हमको तेरे, प्यार ने मारा।
© अंजुम अलीनगरी, दरभंगा बिहार

Friday, September 18, 2026
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Anjum Alinagari

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Alinagar, Darbhanga
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